जब मोहब्बत हवस से हार जाती है, तो रिश्ते अधूरे रह जाते हैं





लेकिन जब मोहब्बत जीतती है, तो हवस खुद को समर्पित कर देती है।

और यही सवाल एक दिन सान्वी ने अंश से पूछा था —

"तुम किस ओर हो, अंश?"

ये कहानी है दिल और जिस्म की उस जंग की, जिसमें हर इंसान कभी न कभी उलझता है। मोहब्बत जहाँ आत्मा से जुड़ने की तड़प होती है, वहीं हवस केवल जिस्म को छूने की ख्वाहिश है।


💔 एक रिश्ता... दो रास्ते

सान्वी के लिए प्यार का मतलब था— इज्जत, एहसास, और भरोसा। अंश के लिए पहले वो सिर्फ एक खूबसूरत शरीर थी।

लेकिन जब वक़्त के साथ वह सान्वी की मुस्कान में सुकून ढूंढने लगा, तो उसे समझ आया कि मोहब्बत कितनी गहराई रखती है।

पर अफ़सोस, एक पल की कमजोरी ने उसकी मोहब्बत को फिर हवस में बदल दिया। सान्वी ने वो देख लिया, जो छुपाया नहीं जा सकता था— नीयत।

"तुम्हारी नज़र क्या देखती है? मेरा दिल या मेरा शरीर?"

वो चली गई… और अंश वहीं ठहर गया… उस सवाल के जवाब के साथ — जो आज भी उसके दिल में गूंजता है।


💡 सोचिए... आप किस ओर हैं?

  • क्या आप किसी के दिल से जुड़ना चाहते हैं या सिर्फ जिस्म से?
  • क्या आपकी मोहब्बत इतनी सच्ची है कि हवस खुद झुक जाए?

रिश्ते ताजमहल जैसे होते हैं— अगर नींव में मोहब्बत न हो, तो हवस की आँधियाँ उन्हें गिरा देती हैं।


🖊️ अंतिम शब्द:

मोहब्बत जब हवस से हार जाए, तो वो रिश्ता टूटता नहीं... सड़ने लगता है।
और जो चीज़ सड़ती है, वो एक दिन बदबू बन जाती है…

जवाब दो खुद को — "तुम किस ओर हो?"


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